भीनमाल (राजस्थान):
राजस्थान सरकार द्वारा पंचायत समितियों के पुनर्गठन की प्रक्रिया के तहत भीनमाल क्षेत्र के ग्राम धानसा, सेरणा और मोदरान को प्रस्तावित पंचायत समिति रामसीन में शामिल करने की योजना का तीव्र विरोध सामने आया है। इन ग्रामों के ग्रामीणों ने एकजुट होकर सेरणा सरपंच जयदीपसिंह राठौड़ के नेतृत्व में उपखण्ड अधिकारी, जसवंतपुरा कार्यालय पहुंचकर अपनी आपत्ति दर्ज करवाई।
📍 भीनमाल से दूरी है कम, रामसीन पहुंचना है कठिन
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि धानसा से भीनमाल की दूरी केवल 28 किलोमीटर है, जबकि रामसीन की दूरी 55 किलोमीटर है। वहीं, भीनमाल के लिए प्रतिघंटा बस सेवा और रेलवे सुविधा भी उपलब्ध है, जबकि रामसीन के लिए कोई नियमित परिवहन सेवा या सड़क मार्ग उपलब्ध नहीं है। रामसीन तक पहुंचने के लिए निजी गाड़ी किराए पर लेनी पड़ती है, जिससे 2500 रुपए तक का खर्च आता है — जो ग्रामीण जनों के लिए भारी आर्थिक बोझ है।
📌 पूर्व में भी किया गया भेदभाव
अनेक ग्रामीणों ने यह भी बताया कि पूर्व में इन ग्रामों को कभी बागोड़ा, कभी जसवंतपुरा और अब रामसीन में डालने के प्रयास किए गए हैं। यह बार-बार की जा रही प्रशासनिक फेरबदल ग्रामीणों के साथ भेदभाव के समान है। अब ग्रामीणजन जागरूक हो चुके हैं और अन्याय सहन नहीं करेंगे।
🗣️ जनप्रतिनिधियों ने क्या कहा?
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विक्रमसिंह राठौड़ (धानसा): “सरकार का उद्देश्य जन सुविधा होना चाहिए, लेकिन यह निर्णय जनता को असुविधा में डालने वाला है।”
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अशोकसिंह जैतावत (सेरणा): “पहले भी लंबा संघर्ष कर इन ग्रामों को भीनमाल में जोड़ा गया था, अब फिर से छेड़छाड़ स्वीकार नहीं।”
⚠️ आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेताया कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो वे कलेक्ट्रेट मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन और आमरण अनशन जैसे जन आंदोलन करने को विवश होंगे।
👥 प्रतिनिधिमंडल में सम्मिलित प्रमुख लोग:
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सेरणा सरपंच जयदीपसिंह राठौड़
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विक्रमसिंह राठौड़ (सोशल एक्टिविस्ट)
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अशोकसिंह जैतावत (भाजपा युवा मोर्चा उपाध्यक्ष)
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चैनसिंह (सोसाइटी अध्यक्ष)
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मांगीलाल सैन (पूर्व उपसरपंच)
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नारायणसिंह, मंगलाराम परमार, प्रवीणकुमार सैन
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छगनाराम सेरणा, उत्तमकुमार मोदरान
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भूपेन्द्र चौधरी, योगेन्द्र भट्ट, शौकत खान आदि