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तीसरे नवरात्रे पर पावन सिद्धपीठ श्री हनुमान मंदिर में हुई मां माता चंद्रघंटा की व्रत कथा और भव्य पूजा

फरीदाबाद से बी.आर.मुराद की रिपोर्ट

फरीदाबाद:पावन सिद्धपीठ श्री हनुमान मंदिर 1बी -ब्लॉक में तीसरे नवरात्रे पर मां चंद्रघंटा की भव्य पूजा अर्चना की गई। इस अवसर पर मंदिर में प्रात: कालीन आरती के लिए श्रद्धालुओं का तांता लग गया और सभी भक्तों ने मां की पूजा अर्चना में हिस्सा लिया। इस दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। सभी भक्तो ने मां के दरबार में अपनी हाजिरी लगाई और उनसे मन की मुराद मांगी। मंदिर संस्थान के प्रधान श्री अशोक अरोड़ा और उनके सुपुत्र युवा नेता एवं समाजसेवी भारत अशोक अरोड़ा ने सभी भक्तों का स्वागत किया। मंदिर प्रधान अशोक अरोड़ा ने प्रात: कालीन आरती का शुभारंभ करवाया। इस अवसर पर उन्होंने श्रद्धालुओं को मां चंद्रघंटा के बारे में बातें बताई और कहा कि जो भी भक्त सच्चे मन से माता रानी से अपनी मुराद मांगता है,वह अवश्य पूरी होती है। माता चंद्रघटा की कथा बताते हुए उन्होंने कहा बहुत समय पहले जब असुरों का आतंक बढ़ गया था तब उन्हें सबक सिखाने के लिए मां दुर्गा ने अपने तीसरे स्वरूप में अवतार लिया था। दैत्यों का राजा महिषासुर राजा इंद्र का सिंहासन हड़पना चाहता था जिसके लिए दैत्यों की सेना और देवताओं के बीच में युद्ध छिड़ गया था। वह स्वर्ग लोक पर अपना राज कायम करना चाहता था जिसके वजह से सभी देवता परेशान थे। सभी देवता अपनी परेशानी लेकर त्रिदेवों के पास गए। त्रिदेव देवताओं की बात सुनकर क्रोधित हुए और एक हल निकाले। ब्रह्मा,विष्णु और महेश के मुख से उर्जा उत्पन्न हुई जो देवी का रूप ले ली। इस देवी को भगवान शिव ने त्रिशूल,भगवान विष्णु ने चक्र,देवराज इंद्र ने घंटा, सूर्य देव ने तेज और तलवार,और बाकी देवताओं ने अपने अस्त्र और शस्त्र दिए। इस देवी का नाम चंद्रघंटा रखा गया। देवताओं को बचाने के लिए मां चंद्रघंटा महिषासुर के पास पहुंची। महिषासुर ने मां चंद्रघंटा को देखते हुए उन पर हमला करना शुरू कर दिया जिसके बाद मां चंद्रघंटा ने महिषासुर का संहार कर दिया था।

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