
रिपोर्ट ब्यूरो
गोरखपुर। हज़रत मुबारक खां शहीद अलैहिर्रहमां की दरगाह है। जो शहर की सैकड़ों साल पुरानी दरगाह है। यह वक्फ विभाग में दर्ज है। ईद के चांद यानी शव्वाल माह की 28,29,30 को उर्स-ए-पाक मनाया जाता है। मेला लगता है। जिसमें हर मजहब के मानने वालों की शिरकत होती है। हज़रत मुबारक खां शहीद पूर्वांचल के बड़ें औलिया-ए-किराम में शुमार होते है। आज भी इस दरगाह को आला मकाम हासिल है। दरगाह से सटे एक मस्जिद, ईदगाह, मदरसा व कई वलियों की मजारें हैं। लोगों के मुताबिक हज़रत मुबारक खां हज़रत सैयद सालार मसऊद गाजी मियां अलैहिर्रहमां के खलीफा व मुरीदीन में से थे। गाजी मियां ने बुराईयों को खत्म करने के लिए आपको गारेखपुर भेजा। हक़ और बातिल की जंग में आपने बहादुरी के साथ लड़ते-लड़ते करीब 29 साल की उम्र में शहादत का जाम पिया। यहां जुमेरात व नौचंदी जुमेरात को काफी भीड़ होती है। आपके साथ आपके भाईयों ने भी शहादत पायी। जिसमें एक भाई की मजार प्रेमचंद पार्क रोड बेतियाहाता स्थित दरगाह हज़रत बाबा तबारक खां शहीद अलैहिर्रहमां के नाम से मशहूर है। जहां दो दिन उर्स-ए-पाक मनाया जाता है। अहमदनगर चक्शा हुसैन गोरखनाथ में हज़रत बाबा जलालुद्दीन शाह का उर्स ग्यारहवीं शरीफ के दिन व हज़रत बाबा मेराज शाह का उर्स ग्यारहवी शरीफ के दो दिन पहले मनाया जाता है। लोग बताते हैं कि यह दोनों बुजुर्ग हज़रत मुबारक खां शहीद के साथी थे।