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YOGI ADITYANATH

धर्म के वास्तविक मर्म को समझा था हनुमान प्रसाद पोद्दार ने : सीएम योगी

विश्व प्रसिद्ध धार्मिक पत्रिका कल्याण के आदि संपादक की 129वीं जयंती पर मुख्यमंत्री ने दी शब्दांजलि

आदर्श जीवन की प्रतिमूर्ति थे भाई जी, जीवन के हर क्षेत्र में छोड़ी छाप: मुख्यमंत्री

रिपोर्ट ब्यूरो

गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि धर्म का वास्तविक मर्म क्या होता है, इसे नित्य लीलालीन गृहस्थ संत भाई जी हनुमान प्रसाद पोद्दार ने समझा था। उसी के अनुरूप देश व लोकहित में उनका पूरा जीवन समर्पित रहा। हर वह नागरिक जिसे अपनी सनातन संस्कृति से थोड़ा भी प्यार है, वह बड़ी ही श्रद्धा के साथ भाई जी का स्मरण करता है। भाई जी सही मायनों में महामानव थे, उन्होंने अपनी साहित्य साधना से कई असंभव जैसे कार्यों को संभव कर दिखाया।

 

सीएम योगी रविवार शाम गीता वाटिका में विश्व प्रसिद्ध धार्मिक पत्रिका कल्याण के आदि संपादक भाई जी हनुमान प्रसाद पोद्दार की 129वीं जयंती पर आयोजित श्रद्धा अर्चन कार्यक्रम में अपने भावों को शब्दांजलि रूप में व्यक्त कर रहे थे। भाई जी का स्मरण करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भक्ति और शक्ति की धरती राजस्थान में जन्म लेने वाले भाई जी ने जीवन के हर क्षेत्र में अपने व्यक्तित्व व कृतित्व की छाप छोड़ी। 1926-27 में गोरखपुर से कल्याण का प्रकाशन कर आदि संपादक के रूप में उन्होंने सनातन साहित्य के गूढ़ रहस्यों को सहज व सरल तरीके से घर-घर पहुंचाने का कार्य किया। सीएम ने कहा कि मनुष्य संत हो या गृहस्थ, उसे कैसा जीवन जीना चाहिए, इसका उदाहरण भाई जी ने अपने व्यक्तित्व व कृतित्व से दिया। वह आदर्श जीवन की प्रतिमूर्ति थे। कोई भी व्यक्ति जब नेकनीयती से अपने कर्तव्यपथ पर आगे बढ़ता है तो उसके लिए संत व गृहस्थ का भेद खत्म हो जाता है। भाई जी भी ऐसे ही थे।

 

मातृभूमि के प्रति कैसा भाव हो, भाई जी ने अपने व्यक्तित्व व कृतित्व से बताया
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भाई जी ने आजादी की लड़ाई के दौरान कल्याण पत्रिका को क्रांतिकारी गतिविधियों का माध्यम बनाने में संकोच नहीं किया। कल्याण पर प्रतिबंध लगाया गया, भाई जी को जेल में डाल दिया गया, प्रताड़ित किया गया लेकिन उन्होंने किसी भी बात की परवाह नहीं की। उन्होंने अपने कृतित्व व व्यक्तित्व से बताया कि मातृभूमि के प्रति भाव कैसा होना चाहिए। साहित्य सेवा, आपदा में सेवा, सनातन मानबिन्दुओं की पुनर्स्थापना, गोरक्षा समेत लोक कल्याण के हर तरह के अभियान में भाई जी का अविस्मरणीय योगदान है। धर्म केवल उपासना विधि नहीं है बल्कि इसका स्वरूप विराट है। धर्म इस लोक में उत्थान और इस लोक के बाद मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। भाई जी हनुमान प्रसाद पोद्दार ने धर्म के सच्चे पथ का अनुसरण किया। उन्होंने कहा कि भाई जी को गए 50 साल हो गए लेकिन देशानुकूल व जनानुकूल साहित्य साधना में कोई दूसरा उनका स्थान नहीं ले पाया। मुख्यमंत्री ने भाई जी की स्मृति में हनुमान प्रसाद पोद्दार स्मारक समिति की तरफ से संचालित कैंसर अस्पताल को बेहतर सेवा प्रकल्प बताया और इसके लिए समिति की तारीफ की।

इस अवसर पर वृंदावन से आए स्वामी अच्युतलाल भट्ट, सांसद रविकिशन शुक्ला, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक सुभाष जी, भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के निदेशक ओमजी उपाध्याय, गोरखपुर विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के प्रो हिमांशु चतुर्वेदी, ललित कला विभाग की अध्यक्ष प्रो उषा सिंह, हनुमान प्रसाद पोद्दार स्मारक समिति के सचिव उमेश।सिंहानिया, संयुक्त सचिव रसेंदु फोगला, न्यासी प्रमोद मातनहेलिया, विष्णु प्रसाद अजितसरिया आदि भी उपस्थित रहे।

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