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पुण्यतिथि पर विशेष: राजीव गांधी का बरेली में कई बार आना हुआ

रिपोर्टर सौरभ पाठक IBN NEWS बरेली

त्रिशूल एयरपोर्ट के लाउंज में बैठकर मेरी उनसे चाय के दौरान काफी राजनीतिक चर्चा भी हुई थी — निर्भय सक्सेना– पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी का बरेली में कई बार आना हुआ। मेरा यह सौभाग्य रहा कि बरेली के त्रिशूल हवाई अड्डे पर उनकी माँ इंदिरा गांधी जी के साथ आमने सामने लाउंज में बैठकर चाय के दौरान काफी राजनीतिक चर्चा भी हुई। यह बात तब की है जब आपातकाल के बाद इंदिरा गांधी चुनाव हार गई और जनता पार्टी की प्रधानमंत्री श्री मोरारजी देसाई के नेतृत्वमें दिल्ली में सरकार बन गई थी। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी कमर कस कर देश के दौरे कर रही थी।

श्रीमती इंदिरा गांधी उसी दौरान 1970 दशक के अंत मे अपने पुत्र राजीव गांधी के साथ बरेली के एयरपोर्ट पर आई थीं। एयर पोर्ट के लाउंज में उनसे काफी सवाल जबाब भी हुए। उसी दौरान जब मैने राजीव गांधी से पूछा कि क्या आप भी राजनीति में उतरेंगे तो उनका सपाट से जवाब था कि मैं तो मम्मी जी के साथ घूमने के इरादे से आया हूँ। श्रीमती इंदिरा गांधी को नानकमत्ता जाना था। मेने भी कॉंग्रेस नेता राम सिंह खन्ना जी की कार से उनके साथ आये एक विदेशी पत्रकार के साथ नानकमत्ता तक का दौरा भी किया। जिसकी रिपोर्टिंग समाचार पत्र में भी छापी।

 

इसके बाद एक बार पुनः त्रिशूल एयरपोर्ट पर ही इंदिरा जी के साथ राजीव गांधी जी का आना हुआ। तो मैने राजीव गांधी से फिर अपना पुराना सवाल ‘क्या राजनीति में आने के लिए ही आपके यह दौरे हो रहे है’ दोहराया । तो वह हंस कर हाथ जोड़ कर आगे बढ़ गए। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जनता पार्टी शासनकाल के बाद फिर सत्ता में वापस आ गईं। 31 अक्तूबर 1984 को श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने।

 

उनके कार्यकाल को कम्प्यूटर क्रांति के नाम से जाना गया। प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 20 मई 1991 को बरेली के विशप मंडल इंटर कॉलेज में दोपहर में जनसभा भी हुई थी। यहां भी मेरी प्रधानमंत्री राजीव गांधी से पत्रकारो के साथ केवल नमस्कार हुई। जल्दी की बजह से पत्रकारो के वह कन्नी काट गए और दक्षिण राज्यो के चुनावी सफर पर निकल गए। इसके अगले दिन 21 मई 1991 को उनकी पेरंमबदुर से ही उनकी हत्या होने के समाचार से देशवासी सन्न रह गए। 40 वर्ष की आयु में प्रधानमंत्री बनने वाले राजीव गांधी भारत के सबसे कम आयु के प्रधानमंत्री थे। साथ ही दुनिया के उन युवा राजनेताओं में से एक थे जिन्होंने सरकार का नेतृत्व किया ।

 

देश में कम्प्यूटर क्रांति से बदलाव के अग्रणी श्री गांधी को देश के इतिहास में सबसे बड़ा जनादेश प्राप्त हुआ था। अपनी मां की हत्या के शोक से उबरने के बाद उन्होंने लोकसभा के लिए चुनाव कराया और उस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को पिछले सात चुनावों की तुलना में अधिक अनुपात में मत मिले और कांग्रेस पार्टी ने 508 में से 401 लोकसभा की सीटें प्राप्त कीं थी।
पूर्व प्रधानमंत्री रहे राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को मुम्बई में हुआ था। उनके पिता फिरोज गांधी भी सांसद थे जिनकी एक अच्छे सांसद के रूप में लोकप्रियता रही।

राजीव गांधी देहरादून के वेल्हम स्कूल में भी पढ़े थे। बाद में दून स्कूल में शिक्षा ली। इसके बाद श्री गाँधी ने कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज, लन्दन के इम्पीरियल कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।

यह तो स्पष्ट था कि राजनीति में अपना करियर बनाने में उनकी कोई रूचि नहीं थी। उनके मित्रो के अनुसार उन्हें पश्चिमी, हिन्दुस्तानी शास्त्रीय, आधुनिक संगीत पसंद था। फोटोग्राफी एवं रेडियो सुनने का भी उनका शौक था।

राजीव जी का हवाई उड़ान भी एक बड़ा जुनून था। इंग्लैंड से घर लौटने के बाद उन्होंने नई दिल्ली फ्लाइंग क्लब प्रवेश परीक्षा पास कर वाणिज्यिक पायलट का लाइसेंस प्राप्त किया। और घरेलू राष्ट्रीय जहाज कंपनी इंडियन एयरलाइंस के पायलट बन गए।
कैम्ब्रिज में ही राजीव गांधी की मुलाकात इतालवी लड़की अंतोनियो माईनो से हुई थी जो उस समय वहां अंग्रेजी की पढ़ाई कर रही थीं। उन्होंने 1968 में अंतोनियो माइनो (सोनिया) से दिल्ली में शादी कर ली थी। वह पत्नी सोनिया एवम दोनों बच्चों, राहुल और प्रियंका के साथ दिल्ली में मां श्रीमती इंदिरा गांधी के निवास पर रहते थे।

1980 में एक विमान दुर्घटना में अपने भाई संजय गाँधी के निधन के बाद राजीव गांधी पर राजनीति में प्रवेश करने एवं अपनी माँ श्रीमती इंदिरा जी को राजनीतिक कार्यों में सहयोग करने का दवाब बढ़ गया था। अपने छोटे भाई संजय की मृत्यु के कारण खाली हुए उत्तर प्रदेश में अमेठी संसदीय क्षेत्र का उपचुनाव भी जीता था। कांग्रेस के महासचिव के रूप में पार्टी संगठन को सक्रिय भी किया था। राजीव गांधी 31 अक्टूबर 1984 को अपनी मां की हत्या के बाद कांग्रेस अध्यक्ष एवं देश के प्रधानमंत्री बने थे।

राजीव जी स्वभाव से गंभीर थे पर आधुनिक सोच एवं निर्णय लेने की उनमें क्षमता थी। राजीव गांधी के कार्यकाल में देश ने ‘कंप्यूटर क्रांति’ भी देखी। उनकी हत्या से एक युवा प्रधानमंत्री देश ने खो दिया था। निर्भय सक्सेना, पत्रकार बरेली।

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