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दिनेश गुप्ता

देवरिया। भाटपार रानी विकास खंड के ग्राम भिंगारी बाजार चल रहे श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा में तीसरे दिन शुक्रवार की रात भक्त प्रह्लाद के प्रसंग का वर्णन करते हुए पंडित घनश्याम ओझा ने कहा कि भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धा और अटूट विश्वास रखने वाले भक्तों पर सदैव प्रभु की कृपा बनी रहती है। भक्त प्रह्लाद का जीवन हमें विपरीत परिस्थितियों में भी धर्म और भक्ति के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है।उन्होंने कहा कि भक्त प्रह्लाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे। उनके पिता हिरण्यकशिपु भगवान विष्णु से द्वेष रखते थे और स्वयं को सर्वशक्तिमान मानते थे। उन्होंने प्रह्लाद को भगवान की भक्ति से विमुख करने के लिए अनेक प्रयास किए, लेकिन प्रह्लाद की आस्था कभी कमजोर नहीं हुई। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी वे भगवान विष्णु का स्मरण करते रहे।पंडित घनश्याम ओझा ने कहा कि जब हिरण्यकशिपु ने भक्त प्रह्लाद को अनेक प्रकार की यातनाएं दीं, तब भी उनका विश्वास भगवान पर बना रहा। अंततः अपने भक्त की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार धारण किया और हिरण्यकशिपु के अत्याचारों का अंत किया। यह प्रसंग संदेश देता है कि अहंकार और अधर्म का अंत निश्चित है तथा सच्ची भक्ति मनुष्य को निर्भय बनाती है।उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण केवल धार्मिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला आध्यात्मिक मार्गदर्शक भी है। भक्त प्रह्लाद की कथा बच्चों और युवाओं को संस्कार, धैर्य, सत्य तथा ईश्वर के प्रति विश्वास बनाए रखने की सीख देती है। यहां प्रमुख रूप से मुख्य यजमान वीर बहादुर सिंह उषा किरण सुरेंद्र सिंह टुनटुन बृजेंद्र सिंह जितेंद्र सिंह डॉ अभय प्रताप सिंह अमरेंद्र सिंह सर्वेंद्र सिंह अजीत शाही ललित सिंह देवव्रत सिंह सरोज सिंह भावना सिंह हेमलता सिंह अनीता सिंह नीलम सिंह शौर्य वीर आर्यवीर रणवीर सहित तमाम श्रोता उपस्थित थे।