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कांग्रेसी नेताओं ने एक दिवसीय उपवास व विरोध कार्यक्रम आयोजित कर जताया अपना विरोध

फरीदाबाद से बी.आर.मुराद की रिपोर्ट

फरीदाबाद:महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) कानून में बदलाव के प्रयासों के विरोध में रविवार को जिले के कांग्रेसी नेताओं ने एन.एच.-5 स्थित महात्मा गांधी पार्क में एक दिवसीय उपवास एवं प्रतीकात्मक विरोध कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान मनरेगा को कमजोर किए जाने के प्रयासों के खिलाफ आवाज बुलंद की गई और मजदूर-किसानों के अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया गया।

इस मौके पर विधायक रघुबीर सिंह तेवतिया,पूर्व विधायक नीरज शर्मा,पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी लखन कुमाार सिंगला,पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी विजय प्रताप सिंह, जिला कांग्रेस अध्यक्ष बलजीत कौशिक,पराग शर्मा,महिला कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुधा भारद्वाज,प्रदेशाध्या महिला सेवादल सुनीता शर्मा,प्रदेशाध्यक्ष कांग्रेस सेवादल डा.पूनम चौहान,अब्दुल गफ्फार कुरैशी,डा.एस.एल.शर्मा,प्रदेश प्रवक्ता सुमित गौड़,योगेश ढींगड़ा,नितिन सिंगला,गिरीश भारद्वाज,प्रियंका भारद्वाज,जगन डागर,विनोद कौशिक,संजय सोलंकी,विकास दायमा,हरीश तंवर,खुशबू खान,रचना भसीन,संजय त्यागी,एस.एस.गौड़,नसीमा खान,विशाल पाण्डे,हरजीत सिंह,हेमलता शर्मा,अजीत तोमर,राजेंद्र चपराना,अनिल शर्मा,सुंदर माहौर,गुलाब सिंह,ईशांत कथूरिया,बलजीत सिंह,ओमप्रकाश चौधरी,हरीलाल गुप्ता,भूषण कुमार,बाबूलाल रवि,अशोक रावल,गजना लाम्बा, सुनीता फागना,सविता चौधरी जिलाध्यक्ष पलवल महिला कांगे्रेस,जयबीर बैंसला,देवदत्त, सूरज ढेडा इत्यादि अनेकों कांग्रेसी कार्यकर्ता मौजूद थे।

इस मौके पर कांग्रेस सेवादल की प्रदेशाध्यक्ष पूनम चौहान,सेवादल जिलाध्यक्ष सुनीता शर्मा व कांग्रेसजनों ने संयुक्त रुप से कहा कि नए नियम में भाजपा मजदूरों के काम करने के संवैधानिक अधिकार को छीन रही है। जबकि कांग्रेस हर परिवार को न्यूनतम 100 दिनों के काम की कानूनी गारंटी मिलती थी। हर गांव में काम की कानूनी गारंटी दी जाती थी। भाजपा के नए प्रावधान में अब पंचायत के पास कोई कानूनी गारंटी नहीं रहेगी। काम केवल मोदी सरकार द्वारा चुने गए गांवों में ही मिलेगा। उन्होंने कहा कि पुराने नियम में पूरे साल काम की मांग कर सकते थे।

कानूनी न्यूनतम मजदूरी की गारंटी दी गई थी,जब नए नियम में फसल कटाई के मौसम में काम नहीं मिलेगा। मोदी सरकार मजदूरी अपनी मर्जी से मनमाने ढंग से तय करेगी। पुराने नियम में पंचायत के माध्यम से अपने ही गांव के विकास के लिए काम मिलता था। काम में मनरेगा मेट और रोजगार सहायकों का सहयोग मिलता था। नए नियम के अनुसार अब आप कहां और क्या काम करेगें,यह मोदी सरकार अपने पसंदीदा ठेकेदारों के माध्यम से मनमाने ढंग से तय करेगी। अब किसी मेट या रोजगार सहायक का सहयोग नहीं मिलेगा।

पुराने नियम में मजदूरी का 100 प्रतिशत भुगतान केन्द्र सरकार करती थी,इसलिए राज्य सरकार बिना किसी चिंता या कठिनाई के काम उपलब्ध कराती थी। नए नियम में अब राज्य सरकारों को मजदूरी का 40 प्रतिशत हिस्सा खुद देना होगा,खर्च बचाने के लिए हो सकता है,वो काम ही उपलब्ध न कराएं। कांग्रेसी नेताओं ने कहा कि कांग्रेस पार्टी भाजपा सरकार के इस तानाशाही फैसले का जमकर विरोध करती है और जब तक सरकार यह फैसला वापिस नहीं लेती,जब तक सड़क से लेकर संसद तक कांग्रेस का संघर्ष जारी रहेगा।

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