फरीदाबाद से बी.आर. मुराद की रिपोर्ट
फरीदाबाद: हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) द्वारा संचालित ई-भूमि योजना को ग्रामीणों तक पहुंचाने और उन्हें इस योजना से होने वाले लाभों से अवगत कराने के उद्देश्य से फरीदाबाद में कई गांवों में विशेष जागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया। यह शिविर जोनल प्रशासक फरीदाबाद की अध्यक्षता में आयोजित किए गए, जिनमें ईओ-1, ईओ-2, जिला नगर योजनाकार (DTP) एवं अन्य सहायक कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
साहुपुरा से मलेरना तक शिविरों में उमड़ी ग्रामीणों की भीड़
जागरूकता शिविर गांव साहुपुरा, सोतई, सुनपेर, जाजरू और मलेरना में आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। गांवों के सरपंच, ग्राम सचिव और पटवारी भी शिविरों में शामिल रहे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को एचएसवीपी द्वारा फरीदाबाद के विभिन्न सेक्टरों के विकास हेतु लागू योजनाओं और ई-भूमि पोर्टल की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
जोनल प्रशासक ने बताया कि ई-भूमि पोर्टल राज्य सरकार का एक पारदर्शी एवं कुशल ऑनलाइन भूमि अधिग्रहण सिस्टम है। इसके माध्यम से भूमि मालिक स्वेच्छा से अपनी भूमि शहरी विकास परियोजनाओं के लिए उपलब्ध करा सकते हैं, और इस प्रक्रिया में उचित मुआवजा, पारदर्शी भुगतान और समयबद्ध प्रक्रिया सुनिश्चित की जाती है।
ग्रामीणों को बताए गए लाभ एवं प्रक्रिया
अधिकारियों ने शिविर में मौजूद ग्रामीणों को बताया कि ई-भूमि योजना के माध्यम से केवल शहरी बुनियादी ढांचे का विकास ही नहीं होता, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि और रोजगार के अवसर बढ़ते हैं। कार्यक्रम में नीचे दिए गए बिंदुओं पर विशेष जानकारी दी गई:
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पोर्टल पर पंजीकरण कैसे करें
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आवश्यक दस्तावेज कौन-कौन से हैं
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मुआवजा दरें और भुगतान की टाइमलाइन
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भूमि मालिकों को मिलने वाले अतिरिक्त लाभ
इस दौरान अधिकारियों द्वारा सवाल-जवाब सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें ग्रामीणों ने खुलकर अपनी शंकाओं को साझा किया और समाधान प्राप्त किया।
फरीदाबाद को योजनाबद्ध शहर बनाने की दिशा में कदम
जोनल प्रशासक ने कहा कि एचएसवीपी का मुख्य उद्देश्य सभी हितधारकों को साथ लेकर फरीदाबाद को एक योजनाबद्ध, आधुनिक और सुविधासंपन्न शहर बनाना है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में ऐसे जागरूकता शिविर जिले के अन्य गांवों में भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोग इस योजना से जुड़ सकें और पारदर्शी भूमि नीति का लाभ उठा सकें।