बलिया। बी.आर. मुराद की रिपोर्ट।
बलिया में निजी स्कूलों में हो रही कथित मनमानी वसूली और अन्य छात्रहित मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) कार्यकर्ताओं और शहर कोतवाल योगेन्द्र बहादुर सिंह के बीच हुई तीखी नोकझोंक के बाद मामला गर्मा गया। इस विवाद के बाद जिला प्रशासन को अंततः झुकना पड़ा और एसपी ओमवीर सिंह ने शहर कोतवाल को लाइन हाजिर कर दिया।
डीएम ऑफिस के बाहर ABVP का धरना, कोतवाल की टिप्पणी बनी विवाद की जड़
जानकारी के अनुसार, ABVP के कार्यकर्ता जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे थे, जहां उन्होंने निजी स्कूलों में फीस वसूली, परीक्षा शुल्क में पारदर्शिता और शिक्षा के क्षेत्र में प्रशासनिक हस्तक्षेप को लेकर विरोध दर्ज कराया। इसी दौरान कोतवाल योगेन्द्र बहादुर सिंह और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस हो गई।
कोतवाल ने कथित तौर पर कहा —
“अगर डीएम साहब पर टिप्पणी की तो घसीटते हुए ले जाएंगे।”
इस कथन ने कार्यकर्ताओं को आक्रोशित कर दिया और उन्होंने तत्काल धरने की घोषणा करते हुए कोतवाल के निलंबन की मांग रखी।
रातभर डटे रहे ABVP कार्यकर्ता, भाजपा जिला अध्यक्ष भी पहुंचे
घटना के बाद ABVP कार्यकर्ता सुबह से रात और फिर पूरी रात तक धरने पर बैठे रहे। इस दौरान जिला भाजपा अध्यक्ष सहित कई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और धरना समाप्त करने की अपील की, लेकिन छात्र संगठन अपनी मांग पर अड़ा रहा।
प्रशासन ने मानी मांग, कोतवाल को किया गया लाइन हाजिर
लंबी बातचीत और समझाइश के बाद जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह और पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने कार्यकर्ताओं से वार्ता की और कार्रवाई का भरोसा दिया। प्रशासनिक आश्वासन के बाद ABVP ने धरना समाप्त किया। अगले ही दिन कोतवाल योगेन्द्र बहादुर सिंह को लाइन हाजिर कर दिया गया, जिससे कार्यकर्ताओं में संतोष देखा गया।
छात्र संगठनों के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा
इस घटना ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि छात्र संगठनों की शक्ति को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। ABVP ने जिस तरह शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावी तरीके से प्रशासन को झुकने पर मजबूर किया, वह एक मिसाल बन गया है।
क्या कहता है प्रशासन?
पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने बताया कि:
“विवाद को गंभीरता से लिया गया है। छात्रों की भावनाओं का सम्मान करते हुए संबंधित अधिकारी को लाइन हाजिर कर दिया गया है।”
स्थानीय राजनीति में हलचल
यह मामला अब केवल प्रशासनिक विवाद नहीं रह गया, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया है। आगामी स्थानीय चुनावों और छात्र संघ के आयोजनों में यह घटना अहम भूमिका निभा सकती है।