मीरजापुर | भारतीय वन्य जीव संस्थान, पर्यावरण मंत्रालय तथा नमामि गंगे अभियान के संयुक्त तत्वावधान में मीरजापुर में आयोजित जलज परियोजना की दो दिवसीय जिला स्तरीय नाविक प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन मंगलवार को जिला पंचायत सभागार में संपन्न हुआ। समापन अवसर पर जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।
🧭 आठ ब्लॉकों से आए 125 नाविकों को मिला प्रशिक्षण
इस कार्यशाला में जनपद के विभिन्न आठ विकासखंडों से आए कुल 125 नाविकों को प्रशिक्षित किया गया। जिलाधिकारी ने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम गंगा प्रहरियों के क्षमता निर्माण के लिए आयोजित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य गंगा नदी को जीवंत बनाए रखने के लिए आस्था और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करना है।
💡 प्रशिक्षण का उद्देश्य
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को निम्नलिखित विषयों पर जानकारी दी गई:
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गंगा नदी में पाई जाने वाली जलीय जैव विविधता और उनके संरक्षण के उपाय
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रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए आवश्यक उपकरणों का वितरण
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आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण एनडीआरएफ व एसडीआरएफ के विशेषज्ञों द्वारा
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प्राथमिक उपचार तकनीक
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पर्यटन, रोजगार और पर्यावरणीय आजीविका के अवसर
🎁 प्रमाण पत्र और प्राकृतिक उत्पादों की प्रदर्शनी
कार्यशाला के समापन पर जिलाधिकारी द्वारा प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए। इसके साथ ही महिला गंगा प्रहरियों द्वारा बनाए गए नेचुरल प्रोडक्ट्स की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे मौजूद गणमान्य अतिथियों द्वारा सराहा गया। इन उत्पादों में हर्बल साबुन, जैविक अगरबत्ती, प्राकृतिक सुगंधित तेल आदि शामिल थे।
🎙️ प्रमुख वक्ता और अतिथि
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डॉ. स्वाति साहा एवं शिवानी पुंडीर (भारतीय वन्य जीव संस्थान) ने कार्यशाला की रिपोर्ट प्रस्तुत की
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प्रभागीय वनाधिकारी अरविंद राज मिश्रा
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परियोजना वैज्ञानिक सौरव गवन
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आपदा विशेषज्ञ अंकुर गुप्ता
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जिला वन अधिकारी समेत अन्य अधिकारी उपस्थित रहे
🔗 भविष्य की योजना
डब्ल्यूआई (WII) की टीम आगे भी नाविकों से जुड़ी रहेगी और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। जलज परियोजना के माध्यम से नाविकों को पर्यावरणीय पर्यटन, बाजार से जुड़ाव और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।