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रसायन विज्ञान विभाग : पुनश्चर्या पाठ्यक्रम

रिपोर्ट ब्यूरो

गोरखपुर। पुनश्चर्या पाठ्यक्रम के शुरुआत में प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में प्रो० ऐ पी मिश्रा, सागर विश्वविद्यालय, सागर, मध्य प्रदेश ने अपना व्याख्यान “बायो-इनआर्गेनिक केमिस्ट्री : मेटलस इन बायोलॉजी” शीर्षक पर दिया, सर्वप्रथम इस सत्र में डा सीमा मिश्रा द्वारा उनका परिचय दिया गया। तत्पश्चात उन्होंने अपना व्याख्यान शुरू किया, उन्होंने अपने व्याख्यान में अकार्बनिक दवाओं के कुछ पहलुओं का वर्णन किया जो अकार्बनिक रसायन विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों को पूरा करते हैं और दवा एवं चिकित्सीय क्षेत्रो में उपयोग किये जाते हैं जैसे कि, एंटीकैंसर, एंटीमाइक्रोबियल, एंटीअल्सर, एंटीवायरल, एंटी-इंफ्लेमेटरी के रूप में। उन्होंने यह भी बताया कि अकार्बनिक यौगिकों का उपयोग कार्डियो वैस्कुलर और इंसुलिन-मिमिक दवाओं के रूप में भी किया जाता है । इस व्याख्यान की समाप्ति के बाद उनका धन्यवाद ज्ञापन डा मनीषा बिष्ट द्वारा किया गया । इसी सत्र का दूसरा व्याख्यान प्रो० के ऐस गुप्ता , राजस्थान विश्वविद्यालय , राजस्थान द्वारा दिया गया। उन्होंने अपना व्याख्यान “ओजोन का वायुमंडलीय रसायन” विषय पर दिया। इस सत्र में उनका परिचय डा विनीता द्वारा दिया गया । इस वयाख्यान में उन्होंने यह बताया कि ओजोन परत कैसे बनता है उन्होंने यह बताया कैसे ओजोन पूरे वातावरण में बहु-चरणीय रासायनिक प्रक्रियाओं में सूर्य कि उपस्थिति में बनता है। अपने व्याख्यान के दौरान उन्होंने ये बताया कि वायु में प्रदुषण के कारण हवा इतनी दूषित हो गई है कि सांस लेना भी मुश्किल हो गया ह। गाड़ियों, कारखानों से जो धुंआ निकल रहा है वो हवा में जहर घोल रहा ह। इसके कारण वायु प्रदुषण बढ़ रहा ह। सिर्फ वायु प्रदुषण ही नहीं बल्कि जल प्रदुषण, ध्वनि प्रदुषण भी बढ़ रहा है । उन्होंने यह भी बताया कि इस बात को नकारा नहीं जा सकता है कि यदि ओजोन परत नहीं होती, तो हमारे ग्रह पृथ्वी पर रहने वाले हर जीव का स्वास्थ्य खतरे में होता, क्योंकि ये सूर्य से आने वाले पराबैंगनी प्रकाश को हम तक पहुँचने से रोकती है परन्तु ओज़ोन में छेद होने के कारण बीमारियों के होने का खतरा काफी बढ़ रहा है जैसे सांस की बिमारी, ब्लडप्रेशर की परेशानी, मोतियाबिंद में विकास और त्वचा के कैंसर इत्यादि, इसलिए हमें ऐसे रास्ते को अपनाना चाहिए जिससे ना सिर्फ हमारा फायदा हो बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ी भी इस बेहद खूबसूरत धरती का आनंद ले सके। इस दिन के दूसरे सत्र में पुनः प्रथम सत्र के वक्ता प्रो० ऐ पी मिश्रा, सागर विश्वविद्यालय ने अपना व्याख्यान बायोमेडिकल अकार्बनिक रसायन विज्ञान “एलिमेंटल मेडिसिन” के आधुनिक पहलुओं पर जो कि रसायन विज्ञान का एक महत्वपूर्ण नया क्षेत्र है, उन्होंने ने यह भी बताया कि
इनमें से कई पहलुओं पर वर्तमान शोध और दृष्टिकोण को इस विषयगत मुद्दे के विभिन्न योगदानों में कैसे उपयोग किया जाय। इस सत्र के समाप्ति के बाद उनका धन्यवाद ज्ञापन डॉ मोहित गुप्ता द्वारा किया गया ।
कार्यक्रम में रसायन विभाग की अध्यक्ष प्रो० सुधा यादव एवम प्रो0 उमेश नाथ त्रिपाठी, सयोंजक, उपस्थित रहे और सत्र का संचालन डा एन पी सिंह द्वारा किया गया।

इस अवसर पर विभाग के सभी शिक्षक गण, सेवानिवृत्त शिक्षक, विश्वविद्यालय के अन्य विभागों के शिक्षक-गण, उपस्थित रहे।

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