फरीदाबाद से बी.आर. मुराद की रिपोर्ट
फरीदाबाद: पर्यावरण जागरूकता और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर डीएवी पब्लिक स्कूल, सेक्टर-49, फरीदाबाद में एक विशेष वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह अभियान SYS ग्रीन क्लब, स्वावलंबन ट्रस्ट तथा कॉर्निटोस इंडिया के संयुक्त सहयोग से संपन्न हुआ।
इस अभियान के अंतर्गत 60 देशी प्रजातियों के पौधे लगाए गए, जिनमें नीम, पीपल, अर्जुन, अमलतास, करंज जैसे पर्यावरण के लिए अत्यंत लाभकारी वृक्ष शामिल थे।
🌿 वृक्षारोपण से जुड़ा जन-जागरूकता संदेश
कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल हरियाली बढ़ाना था, बल्कि छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना भी था। इस अवसर पर SYS ग्रीन क्लब की प्रमुख मीनाक्षी शर्मा ने कहा:
“वृक्षारोपण केवल एक प्रतीकात्मक कार्य नहीं है, बल्कि यह एक सामूहिक जिम्मेदारी है जिसे हर नागरिक को निभाना चाहिए। ऐसे अभियान बच्चों को प्रकृति के करीब लाते हैं और उन्हें जीवन भर के लिए हरित सोच से जोड़ते हैं।”
🌍 सहभागिता और सहयोग की मिसाल बना यह आयोजन
कार्यक्रम में स्वावलंबन ट्रस्ट से प्रमोद मावी, हेतराम सैनी, मनवेंद्र कुशवाहा और कमलेश कुशवाहा ने भाग लेकर पर्यावरणीय स्थिरता के लिए संगठनों की प्रतिबद्धता को उजागर किया। उन्होंने बच्चों और अभिभावकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि:
“आज का पौधा कल का ऑक्सीजन है। यदि हम आज पेड़ नहीं लगाते, तो आने वाली पीढ़ियों को सांस लेना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे अभियानों से समाज की भागीदारी बढ़ती है और बदलाव की नींव रखी जाती है।”
📚 शिक्षा के साथ पर्यावरण की समझ
डीएवी पब्लिक स्कूल, जो शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए जाना जाता है, ने इस अवसर पर पर्यावरणीय शिक्षा को कक्षा से बाहर निकालकर छात्रों के जीवन का हिस्सा बनाने का प्रयास किया। बच्चों ने स्वयं अपने हाथों से पौधे लगाए, उन्हें पानी दिया और उनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी ली।
स्कूल प्रबंधन की ओर से जारी संदेश में कहा गया:
“हम बच्चों को न केवल पाठ्यपुस्तकें पढ़ा रहे हैं, बल्कि जीवन मूल्य भी सिखा रहे हैं – और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता उनमें प्रमुख है।”
🌱 टिकाऊ भविष्य की ओर एक कदम
इस संयुक्त पहल ने यह साबित कर दिया कि जब स्कूल, समाज और कॉर्पोरेट जगत एक साथ मिलकर पर्यावरण के लिए काम करते हैं, तो उसका प्रभाव गहरा और स्थायी होता है। बच्चों में एक हरित सोच विकसित करना, उन्हें प्रकृति के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी का एहसास कराना ही इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी सफलता रही।