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सिवान/बिहार – HORLICKS पर विवाद बिहार सरकार ने लगाई बिक्री पर रोक

IBN24×7NEWS राजीव रंजन कुमार सिवान बिहार
अगर आप शकाहारी है और हॉर्लिक्स पीते हैं तो सावधान हो जाइए।
बताया जा रहा है कि बिहार सरकार द्वारा जांच में हॉर्लिक्स में कई खामियां मिली है।
जिसके बाद इसकी बिक्री पर रोक लगा दी गई है।
जानकारी अनुसार बिहार के मुजफ़्फ़रपुर के ड्रग इंस्पेक्टर विकास शिरोमणि ने एक नोटिस जारी करके ज़िले में हॉर्लिक्स की बिक्री पर पुरी तरह से पाबंदी लगा दी है। लेकिन हॉर्लिक्स बनाने वाली गैलेक्सो स्मिथक्लाइन कंज्यूमर हेल्थकेयर ने बताया है कि उनका उत्पाद पूरी तरह से शाकाहारी है।
गैलेक्सो स्मिथक्लाइन कंज्यूमर हेल्थकेयर के प्रवक्ता ने कहा हमें ड्रग इंस्पेक्टर का नोटिस मिला है।
हमारे सभी उत्पाद फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट के मानकों के तहत आते हैं।
इसी आधार पर इसका लाइसेंस हमें मिला है।
उधर ड्रग इंस्पेक्टर का कहना है कि हॉर्लिक्स बनाने वाली कंपनी गैलेक्सो स्मिथक्लाइन ने इसमें शामिल तत्वों में विटामिन डी के स्रोत को लेकर उठाए गए सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया है अभी तक।
इंस्पेक्टर शिरोमणि ने कहा भारतीय संविधान की धारा 29 (1) कहती है कि हमारी धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता।
मगर गैलेक्सो स्मिथक्लाइन ने हॉर्लिक्स के जरिए करोड़ों हिंदुस्तानियों की धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ किया है।शिरोमणि की ओर से जारी नोटिस के मुताबिक कंपनी ने हॉर्लिक्स के तत्वों में विटामिन D3 और D2 के स्रोतों के बारे में ये साफ़ नहीं किया है कि क्या D2 वनस्पति स्रोतों से और D3 जंतु स्रोतों से लिया गया है।
ज़िला औषधि नियंत्रण विभाग द्वारा करायी गई जांच के मुताबिक हॉर्लिक्स में शामिल विटामिन D के स्रोतों में जंतु स्रोत भी शामिल हैं इसलिए ये मांसाहारी है।
फिर भी कंपनी इस बात को ज़ाहिर किए बिना हॉर्लिक्स को शाकाहारी बताकर बेच रही है।
नोटिस में यह भी लिखा गया है कि हॉर्लिक्स में शामिल प्रोफ़ाइलैक्टिक तत्वों के आधार पर इसे ड्रग लाइसेंस के अंतर्गत बेचा जाना चाहिए था।
मगर कंपनी इसकी बिक्री फ़ूड लाइसेंस के अंतर्गत कर रही है।
लगभग 150 साल पुराने ब्रांड हॉर्लिक्स पर यह प्रतिबन्ध ड्रग और कॉस्मेटिक एक्ट 1940 की धाराएं 22 (I) और (D) के तहत लगा है।
इंस्पेक्टर शिरोमणि का कहना है कंपनी से इस बारे में सवाल किए गए लेकिन कंपनी ने बिना किसी ठोस सबूत के जवाब दिए। जो संतोषजनक नहीं था।
शिरोमणि के मुताबिक हॉर्लिक्स में शामिल कई तत्व प्रोफ़ाइलैक्टिक बीमीरी रोकने वाले पदार्थ की श्रेणी में आते हैं।
इस आधार पर इसकी बिक्री ड्रग लाइसेंस के तहत होनी चाहिए ना कि फूड सप्लिमेंट के आधार पर।
उन्होंने कहा कि इस बारे में भी अब तक कंपनी का कोई जवाब नहीं आया है। उन्होंने बताया एसजीएस लैब में हुई जांच से पता चलता है कि हॉर्लिक्स में विटामिन D3 का इस्तेमाल किया गया जो पशु स्रोतों से मिलता है।
उन्होंने कहा कॉम्प्लैन ने अपने जवाब में ये माना कि वो विटामिन डी की खरीदारी चीन से करता है।
वहीं अमूल पर साफ़ लिखा है कि वो विटामिन D2 का इस्तेमाल करता है जो वनस्पतियों से आता है।
वहीं हॉर्लिक्स की ओर से ऐसा कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।
शिरोमणि ने बीबीसी को बताया कि कंपनी 2015 से लेकर अब तक हॉर्लिक्स बनाने के लिए विटामिन स्रोतों D1, D2, D3, की खरीदारी के दस्तावेज़ मांगे गए हैं जिनका अब तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।

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