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मिर्जापुर: बाणसागर परियोजना-कृष्णपक्ष से शुक्लपक्ष की ओर l खींचातानी के बादल अब छंटेंगे

बाणसागर परियोजना : कृष्णपक्ष से शुक्लपक्ष की ओर l खींचातानी के बादल अब छंटेंगे
मिर्जापुर:  पैतालिस वर्ष पूर्व बाणसागर परियोजना के जीवन का कृष्णपक्ष यह रहा है कि यह परियोजना अपने जन्म के साथ उपेक्षा, धनाभाव, राजनीतिक प्रतिशोधों के चलते अनेकानेक बार लड़खड़ाती मुंह के बल गिरती भी रही लेकिन अब इसका शुक्ल पक्ष शुरू हुआ है । इसका लोकार्पण भी गुप्तनवरात्र आषाढ़ शुक्ल पक्ष तृतीया 15 जुलाई ’18 को प्रस्तावित है ।
तीन प्रदेशों के लिए बनी इस परियोजना में तीन प्रदेशों की हिस्सेदारी है । त्रिकोणधाम मां विंध्यवासिनी के जनपद में इसके लोकार्पण की रूपरेखा यू पी दिवस 25 जनवरी ’18 को ही बन गयी थी जब इसका मॉडल लखनऊ की प्रदर्शनी में रखा गया । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अभिभूत हुए तो उन्होंने सार्वजनिक रूप से इसके लोकार्पण के लिए 20 मार्च ’18 की तिथि तय की । यह तिथि भी वासन्तिक नवरात्र (चैत्र) की तृतीया तिथि थी ।
लेकिन लोकार्पण के लिए पी एम का समय नहीं मिला और गर्मी की विभीषिका को दखते हुए मुख्य अभियंता ने 25 मार्च ’18 को अपने मातहतों एवं कुछ प्रबुद्ध लोगों के साथ पूजन कर मेजा डैम के लिए गेट खोला तो वह तिथि भगवान श्रीराम की जन्मतिथि चैत्र नवरात्र की नवमी तिथि ही थी । इस दिन यहां पी एम के लिए शिलापट्ट का स्थान छोड़ दिया गया था ताकि वे ही औपचारिक लोकार्पण करें ।
मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के देवलोन इलाके में टमस नदी पर आजादी के 9 साल बाद हरितक्रांति अभियान के तहत विशाल परियोजना में वर्षा के लिए 4 MAF पानी एकत्र किए जाने की योजना बनी । MAF ( मिलियन एकड़ फीट) पानी के लिए बिहार एवं यू पी की भी हिस्सेदारी तय हुई जिसमें 2 हिस्सा मध्यप्रदेश तथा एक एक हिस्सा इन दोनों प्रदेशों के लिए तय हुआ । यद्यपि 1973 में यूपी ने एग्रीमेंट पत्र पर हस्ताक्षर किया लेकिन अलग-अलग प्रदेशों की खींचातानी ही इस परियोजना का अंधकार पक्ष रहा है ।
वैसे तो अंधकार के बादल मध्यप्रदेश एवं उत्तर प्रदेश के बीच अभी भी उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं लेकिन केंद्रीय जल आयोग की पंचायत इसका समाधान निकालने में लगी है । क्योंकि मध्यप्रदेश ने अपने क्षेत्र में इस परियोजना पर विद्युत उत्पादन भी शुरू किया और उसका मूल्य पूरे डैम पर लगाकर कुल लागत का चौथाई का दावा यू पी से किया । यू पी ने इस पर आपत्ति की है कि बिजली उत्पादन से यूपी का कोई लेना देना नहीं है ।
यू पी द्वारा कुछ अवधि में मध्यप्रदेश को यूपी के हिस्से की लागत नहीं दी गयी तो एमपी ने संशोधित (रिवाइज) मूल्य पेश किया जबकि यूपी के अभियंताओं का दावा है कि इस अवधि में यूपी को उसके हिस्से का पानी न देकर एमपी ने उसका इस्तेमाल किया है । अतः जलमूल्य यूपी को मिलना चाहिए । फिलहाल पी एम के लोकार्पण से सारे अंधकार दूर होंगे, इसी संभावना के तहत मुख्यमंत्री ने लोकार्पण के फीते काटने की कैंची पी एम को थमाना बेहतर समझा ।
 
रिपोर्ट विकास चन्द्र अग्रहरि ibn24x7news मिर्जापुर

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