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बंद हो सकती है मिड डे मील योजना, लाभार्थी को सीधे मिलेंगे पैसा, CM नीतीश ने की मांग

बंद हो सकती है मिड डे मील योजना, लाभार्थी को सीधे मिलेंगे पैसा, CM नीतीश ने की मांग
नीति आयोग की बैठक में सीएम नीतीश ने मिड डे मिल को बंद करने की मांग की। कहा कि इसके बदले लाभार्थी को सीधे पैसा मिलना चाहिए…
पटना। नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्कूलों में मिड डे मील को बंद कर उसकी राशि संबंधित लाभार्थी के बैैंक खाते में सीधे स्थानांतरित किए जाने की बात कही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि  आंगनबाड़ी केंद्रों पर दिए जाने वाले भोजन को लेकर भी डायरेक्ट बेनफिट ट्रांसफर मोड में लाभुक के खाते में पैसा स्थानांतरित किया जाए। कम से कम इस योजना के पायलट प्रोजेक्ट को आरंभ कर देना चाहिए।
मानदेय का पुनरीक्षण एवं वित्तीय भार वहन करे केंद्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र प्रायोजित योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए अनेक कर्मियों को संविदा पर बहाल किया जाता है। ऐसे कर्मियों की संख्या खासी बड़ी है और ये संगठित होकर मांग करते हैैं। उनका सुझाव है कि अगर केंद्र प्रायोजित योजनाओं में ऐसे कर्मियों को लंबी अवधि तक बहाल रखा जाता है तो इनके मानदेय में एक निर्धारित अवधि पर यथोचित बढ़ोतरी की जानी चाहिए और इसका पूर्ण वित्तीय भार केंद्र सरकार को वहन करना चाहिए।
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कृषि रोड मैप की योजनाओं के लिए मांगी मदद
नए कृषि रोड मैप की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले पांंच वर्ष में कृषि रोड मैप की योजनाओं के क्रियान्वयन पर एक लाख, चौवन हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे। इन योजनाओं के लिए केंद्र सरकार समुचित वित्तीय सहयोग दे।
कृषि इनपुट अनुदान में मिले सहायता
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका यह दृढ़ मत है कि किसानों को इनपुट अनुदान के माध्यम से ही सहायता दी जानी चाहिए। ऐसा होने से कृषि के कुल उत्पादन लागत में कमी आएगी।  बिहार में जैविक सब्जी उत्पादकों के लिए पटना, नालंदा, वैशाली और समस्तीपुर के किसानों के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इस योजना को चरणबद्ध रूप से राज्य में सभी फसलों पर लागू करने के लिए अधिक संसाधन की आवश्यकता होगी। केंद्र सरकार को इनपुट अनुदान योजना को वित्त पोषित करने के लिए राज्य को मदद करनी चाहिए।
बिहार फसल सहायता योजना में पचास प्रतिशत राशि केंद्र दे
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की जगह बिहार सरकार द्वारा हाल ही में आरंभ की गई बिहार फसल सहायता योजना का भी जिक्र मुख्यमंत्री ने नीति आयोग की बैठक में किया। उन्होंने कहा कि बिहार राज्य फसल सहायता योजना के अंतर्गत सहायता राशि में पचास प्रतिशत केंद्र सरकार की भागीदारी पर विचार किया जाना उचित होगा।
वित्त आयोग की अनुशंसा में राज्यों की हिस्सेदारी के पैमाने में बाहरी वजह भी जोड़ें
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नीति आयोग की बैठक में वित्त आयोग की अनुशंसा के तहत राज्यों को मिलने वाली राशि के मानदंड में बाहरी वजहों को शामिल किए जाने पर भी बल दिया।
मुख्यमंत्री ने बिहार का जिक्र करते हुए कहा कि नेपाल व अन्य राज्यों से निकलने वाली नदियों की वजह से प्रति वर्ष आने वाली बाढ़ से बिहार को बड़े पैमाने पर नुकसान होता है। आधारभूत संरचना के नुकसान की भरपाई के लिए बिहार को अतिरिक्त वित्तीय भार उठाना पड़ता है। इसलिए यह जरूरी है कि राज्यों की हिस्सेदारी से संबंधित मानदंडों के निर्धारण के दौरान बाहरी कारणों का भी समावेशन किया जाए। वहीं हरित आवरण को बढ़ाने के लिए राज्यों द्वारा किए जा रहे प्रयासों को प्रोत्साहित करने के लिए विशिष्ट अनुशंसा करना भी राज्य व राष्ट्र हित में होगा।
सामूहिक क्षमादान पर विचार करें
राष्ट्रीय स्तर पर महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती पर होने वाले कार्यक्रमों के संबंध में मुख्यमंत्री ने यह सुझाव दिया कि इस अवसर पर सामूहिक क्षमादान पर विचार किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में विशेष अवसरों पर सामूहिक क्षमा की प्रक्रिया रही है। गांधी जी की 150 वीं जयंती के अवसर पर गंभीर मामलों में संलिप्त विचाराधीन या फिर दोषसिद्ध अपराधी को छोड़कर छोटे-छोटे मामलों में बंद कैदियों को विहित  प्रक्रिया के तहत क्षमादान दिया जा सकता है। इसमें महिला कैदी अथवा वैसे कैदी जिनकी उम्र साठ वर्ष से अधिक है को प्राथमिकता दी जा सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका यह भी सुझाव होगा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के जीवन प्रसंग एवं जीवन परिचय पर आधारित पुस्तकों को देश के सभी विद्यालयों में उपलब्ध कराया जाए।

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