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फरीदाबाद – निर्मला धामा समाजसेवी डॉक्टर भीमराव अंबेडकर एजुकेशन सोसायटी को सम्मानित किया गया

फरीदाबाद से बी.आर.मुराद की रिपोर्ट

फरीदाबादःसेवानिवृत्त प्रशासन अधिकारी को गणतंत्र दिवस समारोह में महिला सशक्तिकरण के लिए सम्मानित किया गया।
डॉक्टर भीमराव अंबेडकर एजुकेशन सोसायटी फरीदाबाद की मुख्य संयोजक,वरिष्ठ समाज सेविका एवं नगर निगम फरीदाबाद की सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी निर्मल धामा को आज 26 जनवरी 2022 को 73 वें गणतंत्र दिवस समारोह में महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में वंचित समाज की लगभग 12 सौ से अधिक युवतियों और महिलाओं को कंप्यूटर,ब्यूटी पार्लर,सिलाई कढ़ाई तथा कौशल विकास मैं प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने के लिए हरियाणा सरकार के खेल एवं युवा मंत्री संदीप सिंह के द्वारा सम्मानित किया गया। इस अवसर पर निर्मला धामा ने कहा के उनका पूरा जीवन संघर्ष और चुनौतियों से भरा रहा है जिसे उन्होंने पूरी ईमानदारी,कड़ी मेहनत पक्का इरादा,अनुशासन और सकारात्मक दृष्टिकोण से जिया। गीता में कहा गया है के व्यक्ति को अपना कर्म करना चाहिए और फल प्राप्ति परमात्मा पर छोड़ देनी चाहिए।उन्होंने इस कहावत को अपने पूरे जीवन में आत्मसात किया और उसके परिणाम भी अच्छे मिले। निर्मला धामा ने कहा कि उनका बचपन से ही सपना था कि वह स्वयं ज्यादा से ज्यादा पढ़े और बड़ी अधिकारी बनकर महिलाओं और लड़कियों की शिक्षा के लिए कार्य करें। इसलिए वह हमेशा परमपिता परमात्मा से प्रार्थना करती रहती थी कि उनकी शादी ऐसे लड़के और परिवार में हो जो उसे आगे पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें और पढ़ने से ना रोके। वह जब दसवीं कक्षा में पढ़ती थी तभी उनकी शादी एक आर्य समाजी और स्वतंत्रता सेनानी परिवार में हो गई। परमात्मा ने उनकी इस प्रार्थना को सुना और और उन्हें आगे पढ़ने से कभी नहीं रोका गया। शादी के समय मेरे पति ने मुझे तीन छोटी छोटी सी किताबें पढ़ने के लिए दी। एक किताब बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की जीवनी थी जिसमें तीन मूल मंत्र लिखे हुए थे और पहला मंत्र शिक्षा का था। उस पुस्तक में महिलाओं की शिक्षा और उनके सशक्तिकरण के बारे में लिखा था। दूसरी पुस्तक महात्मा ज्योतिबा फुले की जीवनी थी जिसमें लिखा था कि उन्होंने पहले अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले को पढ़ाया और फिर उनकी पत्नी ने बालिकाओं की शिक्षा के लिए बालिका स्कूल खोलें। तीसरी किताब स्वामी दयानंद सरस्वती की जीवनी थी जिसमें लड़कियों को लड़कों के समान शिक्षा के अवसर प्रदान करने बारे लिखा हुआ था। इन तीनों पुस्तकों को पढ़ने से मेरे मन दिल और दिमाग पर गहरा प्रभाव पड़ा और मैंने यह फैसला कर लिया कि चाहे जितनी भी मुश्किलें आएं उच्च शिक्षा प्राप्त करूंगी और अपने पूरे जीवन लड़कियों के पढ़ने के लिए और महिला सशक्तिकरण के लिए कार्य करूंगी। मुश्किलें इतनी आई की उनका वर्णन करना भी मुश्किल है लेकिन मैंने हिम्मत नहीं आ रही और अंत में सफल रही। उन्होंने कहा कि हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नें वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री के पद की शपथ लेते ही हरियाणा के पानीपत शहर से महिलाओं के विकास के लिए बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ का नारा दिया और महिला सशक्तिकरण के लिए समाज को आवाहन किया।इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर लगातार प्रयासरत है। मैंने वर्ष 2014 में सेवानिवृत्ति के बाद अपने पूरे जीवन को बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान और महिला सशक्तिकरण के लिए अर्पित कर रखा है। निर्मला धामा ने कहा कि उनका यह मानना है कि जब आप दूसरों के लिए कुछ करना चाहते हैं या स्वयं के लिए कुछ करना चाहते हैं तो उसके लिए स्वयं को उन रास्तों पर चलने की आदत डालनी होगी जहां आप जाना चाहते हैं। मैंने अपनी जिंदगी में यही किया और इसलिए मैं जिंदगी में सफल रही। मुझे दूसरों की मदद करने में आनंद और खुशी का आभास होता है। यह मेरा जुनून है जो मेरे जीवन के साथ साथ चला आ रहा है। मैंने अपनी सरकारी नौकरी के दौरान और सेवानिवृत्ति के बाद भी विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर सामाजिक और नारी सशक्तिकरण के लिए लगातार प्रयास किए हैं जिसके कारण मुझे विभिन्न संस्थाओं के द्वारा समय-समय पर सम्मानित किया गया। आज मैं एक बार फिर इस पावन अवसर पर सम्मानित होने पर गर्व महसूस कर रही हूं और मैं जिला उपायुक्त महोदय और अतिरिक्त उपायुक्त महोदय की विशेष आभारी हूं जिन्होंने मेरी सेवाओं को देखते हुए आज मुझे सम्मानित करने का निर्णय लिया है। महिलाओं को एक ही संदेश देना चाहती हूं कि हमें पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर साथ चलना चाहिए क्योंकि पुरुष और महिलाएं दोनों ही समाज के दो पहिए हैं जिनके संतुलन से ही यह समाज और देश आगे बढ़ सकता है।

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