बेतिया: बेतिया मंडलकारा में कैदियों की स्थिति निंदनीय क्षमता से अधिक कैदी रहने पर मजबूर, मानवाधिकार का खुल्लम खुल्ला उल्लंघन। सुरैया शहाब

Ibn24x7news विजय कुमार शर्मा प,च,बिहार

स्थानीय शहर से सटे बेतिया मंडलकारा में कैदियों की स्थिति अति चिंताजनक एवं निंदनीय हो गई है क्योंकि इस मंडल कारा में मात्र 623 कैदियों की रहने की जगह है मगर आजकल 2023 कैदी रह रहे हैं जिनकी मानसिक स्थिति के साथ साथ शारीरिक स्थिति का भी कई पहलू से ठीक नहीं है जो चिंता का विषय है। बेतिया मंडल कारा में विभिन्न कांडों के अंतर्गत रहने वाले कैदियों की सुरक्षा भोजन वस्त्रों मेडिकल सुविधा शौचालय स्नान गार तथा सोने की व्यवस्था जानवर से भी बुरा है। कैदियों को सही समय पर भोजन स्नान शौचालय रहने का कमरा सोने की व्यवस्था लगभग ना के बराबर है इन कैदियों की स्थिति को देखकर यह कहा जा सकता है कि मंडल कारा में पदस्थापित विभागीय कर्मी पदाधिकारी एवं सफाई करने वाले कर्मियों की स्थिति भी अति दयनीय है। समय पर खाना पीना रहना सहना स्नान ध्यान दर दवाई के साथ शौचालय की भी व्यवस्था सही नहीं है। मंडल कारा के मीनू के अनुसार जो कैदियों के लिए बिहार सरकार से अनुमानित है उनका स्टैंडर्ड भी मानकता से बहुत ही कम है जो निंदनीय के साथ खेद का विषय है|
जेल के अंदर रहने वाले बुजुर्ग एवं महिला कैदियों का भी रहने का वार्ड सही एवं दुरुस्त नहीं है तथा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। बेतिया मंडलकारा में कैदियों की सही संख्या और किस जुर्म में किस कांड के अंतर्गत बंद हैं इसकी सही जानकारी विभाग से नहीं मिल पाती है जिससे अंदाजा लगाया जा सके की कैदियों की स्थिति इस मंडल कारा में क्या है। बुजुर्ग एवं महिला कैदियों से मिलने के लिए कई तरह से कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है प्राप्त सूत्रों के अनुसार इन कैदियों की हालत चिंताजनक बनी हुई है जिसको देखने वाला कोई नहीं है। विभागीय पदाधिकारी मंडल कारा में पदस्थापित जेल अधीक्षक उपाधीक्षक अन्य पुलिसकर्मी भी अपनी जिम्मेवारी सही तौर से नहीं निभा पाते हैं जिसके वजह कर जेल के अंदर विभिन्न गुटों के चलने वाले कैदियों में प्रतिदिन मारपीट गाली-गलौज भूख हड़ताल अमाउंट नया ले ले जाते समय पुलिस कस्टडी से भाग जाना यह नित्य दिन की बात बन गई है फिर भी यह पदाधिकारी इन पर ध्यान नहीं देते हैं केवल कर्मियों को सस्पेंड करके उनके सजा के हकदार बना देते हैं मगर कुछ दिनों के बाद वो फिर अपनी ड्यूटी ज्वाइन कर लेते हैं इससे इन पुलिसकर्मियों का मनोबल बढ़ा हुआ रहता है और कैदी भी इसी तरह की घटना करके भागने में सफल हो जाते हैं कभी कभी ऐसा सुना गया है |
कि पुलिस की मिलीभगत से ही कैदियों के भागने का सिलसिला जारी रहता है जो समाचार पत्रों के माध्यम से लोगों को जानकारी होती रहती है। बहुत सारे ऐसे कैदी हैं जो विगत 10 से 15 वर्षों से इस मंडल कारा में अपनी अंतिम सांस ले रहे हैं मगर उनका केस का मुकदमा न्यायालय से त्वरित कार्यवाही नहीं हो पाने के कारण इस जस की तस बनी रहती है ऐसे देखा जाता है कि न्यायालय में सही समय पर पैसीे नहीं होने और न्यायालय में संबंधित कागजातों कि सही समय पर उपस्थिति नहीं होने से इनको जेल से छूटने में कई प्रकार की कमियां रह जाती हैं जिससे इन कैदियों का उम्र के अनुसार रिहाई नहीं हो पाती है।
अदालतों की जिम्मेदारी बनती है कि इन बुजुर्ग महिला कैदियों का इनसे संबंधित आवश्यक कागजातों को इनसे संबंधित और न्यायालयों में शीघ्र जमा करने हैं ताकि इनको न्याय मिलने में आसानी हो सके। इसी संबंध में बेतिया मंडलकारा के स्थिति को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संघ भारत के जिला अध्यक्ष श्रीमती सुरैया साहब ने इन कैदियों को इस स्थिति के बारे में कहने पर मजबूर हुई हैं कि यह जितनी भी घटनाएं कैदियों के साथ घट रही हैं वह सरासर मानवाधिकार का हनन है इस पर अगर सही कार्रवाई नहीं की गई तो आगे और स्थिति खराब हो जाएगी जिसकी सारी जिम्मेदारी जिला प्रशासन एवं जेल प्रशासन की होगी। अध्यक्ष महोदय ने जिला पदाधिकारी एवं जेल प्रशासन से मांग की है कि कैदियों की स्थिति को देखते हुए उनके रहने सहने खाने पीने सोने उठने शौचालय स्नान घाट चिकित्सा सुविधा का बेहतर इंतजाम किया जाए ताकि इन कैदियों को सभी किसिंग की सुविधा प्राप्त हो सके।

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