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तोप से भी अधिक होता है लेखनी का प्रहार: डा दिनेश शर्मा

Ibn news लखनऊ

सीमाओं को पार कर विदेश तक पहुंच चुकी है हिन्दी

लेखनी और हिन्दी भाषा तमाम भाषाओं को कर लेती है अपने अन्दर समाहित*

देश और प्रदेश कि स्थितिया लांघ चुकी है भाषाओं की सीमा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों द्वारा हिन्दी में निर्णय देना एक सुखद अनुभव

मुंशी प्रेमचन्द्र जैसे साहित्यकारों की कृतियों में थी लोगों के जीवन में परिवर्तन लाने की क्षमता

18 December 2021लखनऊ/इटावा-उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने इटावा में आयोजित हिन्दी सम्मान समारोह में बोलते हुए कहा  कि लेखनी का प्रहार तोप से भी बड़ा होता है क्योंकि  लेखनी शांति , सौहार्द्र और समन्वय का मार्गदर्शन बनती हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जम्मू कश्मीर के राज्यपाल श्री मनोज सिन्हा की उपस्थिति में उन्होंने कहा कि लेखनी और हिन्दी भाषा तमाम भाषाओं को अपने अन्दर समाहित कर लेती है। यह समुद्र की तरह है जिसमें तमाम नदियों का समर्पण होता है। हिन्दी एक ऐसी भाषा है जो दूसरी भाषा के शब्दों को अपने में जोडकर उसका प्रवाहन अपने अनुरूप करती है।यह समाज में राजभाषा के रूप में विद्यमान है तथा यह राष्ट्र भाषा के रूप में आए यह सभी की इच्छा है।

उन्होंने कहा कि समय के अनुसार देश और प्रदेश की स्थितियां  भाषाओं की सीमा को लांघ चुकी हैं।
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की ’’निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल’’ केा उधृत करते हुए उन्होंने पूछा कि निज भाषा की उन्नति किस प्रकार से होगी। इसके बाद उन्होंने अपने ही प्रश्न का स्वयं उत्तर देते हुए कहा कि यह तभी संभव है जब कि ऊपर बैठे लोग इसका मार्ग दर्शन एवं निरूपण करेंगे तथा अन्य लोगों को प्रेरक प्रसंग के जरिये उत्प्रेरित करेंगे और तभी यह श्रंखला निश्चित रूप से तेजी से आगे बढ़ेगी।
  शर्मा ने कहा कि यह सुखद आश्चर्य है कि उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अपने दसियों हजार निर्णय को हिन्दी में लिख रहें हैं। उनका कहना था कि यह कार्यक्रम एक लम्बी श्रंखला है पर यहां आने पर ऐसा महसूस हो रहा है कि जैसे यहां पर  लघु भारत के दर्शन हो रहे हैं।उनका यह भी कहना था कि इस्लामियां इण्टर कालेज में वर्ग विशेष द्वारा वन्दे मातरम का गायन भारत एवं उत्तर प्रदेश की परंपरा के अनुकूल है। भारतीय संस्कृति का प्रतिपादन करनेवाले जो लोग यहां मौजूद हैं वे बधाई के पात्र हैं।
   उपमुख्यमंत्री ने कहा पहले के समय में मुशी प्रेमचन्द्र जैसे साहित्यकारों की जो कृतियां होती थीं वे किसी भी व्यक्ति के जीवन पर अमिट छाप ही नही छोड़ती थीं बल्कि उसके जीवन में बदलाव भी आ जाता था। आज हिन्दी काव्य का स्वरूप बदल रहा है ।कवि परिवर्तन का सूचक होता है। उप मुख्यमंत्री का कहना था कि हिन्दी आज देश की सीमाओं को पार कर कई अन्य देशों में पहुंच चुकी है। इसके कई उदाहरण उन्होंने अपनी विदेश यात्रा में  देखे हैं जहां पर लोग कई स्थानों पर भारतीयों से भी बेहतर हिन्दी बोलते हैं।आज  पाश्चात्य दर्शन का  जो भाव मन में जागृत हो रहा है उसमें हिन्दी का भाव या तो अपमानित होता है या विलोपित होता है।उनका कहना था कि हिन्दी केवल भाषा ही नही बल्कि संस्कार भी है।संस्कार के लिहाज से  भारतीय संस्कृति दर्शन है और पाश्चात्य संस्कृति प्रदर्शन है। प्रायः लोग प्रदर्शन की ओर आकर्षित होने  लगते हैं और दर्शन से विमुख होने लगते हैं।उन्होंने  कार्यक्रम में मौजूद जम्मू काश्मीर के राज्यपाल का जिक्र किया और कहा कि वे हिन्दी के बहुत बड़े प्रेमी है और उनकी वजह से आज हिन्दी जम्मू काश्मीर तक पहुंच गई है।राज्यपाल ने आज पूरे देश को यह अनुभूति कराई है कि राष्ट्रीय ध्वज आज लाल चैक में न केवल फहराता है बल्कि वहां पर वन्दे मातरम का गायन भी होता है। उनका कहना था कि उनकी अभिलाषा है कि आनेवाले समय में हिन्दी और समृद्ध होकर एक मजबूत भाषा के रूप में उभरे और उसका विस्तार अन्य देशों में और होता रहे।
समारोह की अध्यक्षता राष्टीय हरित अधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री आदर्श गोयल ने की । समारोह में  यूपी सरकार में मंत्री श्री नन्दगोपाल गुप्त  एवं सदस्य हरित अधिकरण न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल  भी उपस्थित रहे।
समारोह में प्रसिद्ध व्यंगकार पद्मश्री डा अशोक चक्रधर  को न्यायमूति प्रेम शंकर गुप्त जनवाणी सम्मान से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विधान परिषद के सभापति  कुंवर मानवेन्द्र सिंह , पद्मश्री मनोज जोशी , प्रसिद्ध कवियत्री दीप्ति मिश्रा ,डा इन्दु झुनझुनवाला एवं कवि लाखन सिंह को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन इटावा हिन्दी सेवा निधि के द्वारा किया गया।

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