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झाँसी – बुन्देल खण्ड में गिरते जल स्तर का इजरायली पाँच सदस्यीय विशेषज्ञ टीम ने किया अध्ययन

Ibn24x7news रिपोर्ट महेंद्र सिंह सोलंकी ब्यूरो चीफ झाँसी

झाँसी 13 जुलाई। सूखे बुन्देलखण्ड में जल श्रोतों को बचाने का इजराइली फाॅर्मूले का लाभ जल्द ही मिल सकता है। भूजल स्तर का अध्ययन करने के लिए पांच सदस्यीय इजरायली विशेषज्ञ दल गुरुवार को झांसी पहुंचा। यहां अधिकारियों से बात करते इजारयली टीम ने कई बातों पर चर्चा की।
गौरतलब है कि इजराइल के साथ एमओयू साइन हो चुका है। जिसमें इजरायली तकनीकि के माध्यम से बुन्देलखण्ड की सूखे की परेशानी को दूर किया जाएगा। इरायजल में कम पानी में ही फसलों के उत्पादन से लेकर सारी व्यवस्थाओं को बेहतर किया जाता है. ऐसे में बुन्देलखण्ड के दिन भी बदलने की ओर आगे बढ़ते दिख रहे है। पांच सदस्यीय टीम झांसी में अधिकारियों से चर्चा करने के बाद ललितपुर जिले के लिए रवाना हो गयी है. यहां पर हर पहलू को समझने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार को रिपोर्ट दी जाएगी। इसके बाद जल संरक्षण और कम पानी में फसल उत्पादन को लेकर ठोस शुरुआत की जाएगी। बुंदेलखंड में कई सालों से प्रकृति अपना रौद्र रूप दिखा रही है। मानसूनी बारिश कम होने के कारण हर तीन साल में सूखे जैसे हालात बन रहे हैं। विशेषज्ञोें का कहना है कि जल प्रबंधन का अभाव इस त्रासदी के लिए कम जिम्मेदार नहीं है। दरअसल अब तक यहां जमीन से जल निकालने की योजनाएं तो बनाईं गईं, लेकिन धरती में जल पहुंचाने पर ध्यान नहीं दिया गया। इसका परिणाम अब सामने आ गया। भूजलस्तर धरा की गहराई में समाता जा रहा है। इससे पेयजल श्रोत लगातार कम हो रहे हैं. बुंदेलखंड को इस कलंक से मुक्ति दिलाने के लिए सरकार बहुत गंभीर है. इजरायल की टीम ने झांसी जिले में जल श्रोतों का अध्ययन शुरू कर दिया है। पांच सदस्यीय शिष्ट मंडल गत दिवस बांदा के जल श्रोतों का अध्ययन कर चुका है। झांसी के बाद यह दल देरशाम ललितपुर चला जायेगा। इजरायली दल में शामिल इजराइल में भारत के राजदूत और टीम के सदस्य विनोद मेहता ने बताया कि भारत और इजरायल की जलवायु में काफी समानताएं हैं. यहां इजरायल से बहुत ज्यादा बारिश होती है। बुंदेलखंड में बारिश का पानी 800 एमएम आता है जबकि इजरायल में 300 एमएम आता है. इसे कैसे संचय किया जाये, ड्रिप सिंचाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया। तो काफी बचत होगी। उन्होंने कहा कि इसकी रिपोर्ट बनाई जायेगी। यूपी सरकार से बातचीत की जायेगी. एक स्थान पर इसका पायलट प्लांट लगाया जायेगा।
जिलाधिकारी शिव सहाय अवस्थी ने बताया कि कृषि की विशेष तकनीक को देखते हुए इसको किस तरह से इम्प्रूव किया जा सकता है और इनके सुझाव यहां शेयर करेंगे। किस प्रकार का इनका अनुभव रहा है. यह अपनी रिपोर्ट का हिस्सा बनाएंगे।
रिपोर्ट – महेन्द्र सिंह सोलंकी।

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