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चुनार मीरजापुर: मौलिक अधिकारों की बहाली कब तक

मौलिक अधिकारों की बहाली कब तक
जनपद मीरजापुर की एक प्राचीन और ऐतिहासिक नगरी अहरौरा है जहाँ नगर पालिका है।वर्तमान परिप्रेक्ष्य में पच्चीस वार्डों की नुमाइंदगी यह पालिका करती है। इसमें से दो वार्डों में नगर पालिका कभी भी समुचित विकास कार्य नहीं करा पायी है। पहला मुहल्ला गोला सहुवाईन है और दूसरा गोला पाण्डेय जी है। इन दोनों गोलों में रोड, नाली, सफाई व्यवस्था का अभाव है। गोला पाण्डेय जी के पूर्वी छोर पर बहुत बड़ा नाली का जमावड़ा जल निकासी के अभाव में है। इसमें कटरा मुहल्ले की पानी गिरती है, सड़ती है, दुर्गंध बिखेरती है। इसके इर्दगिर्द के रहवासी व्यवस्था से असहाय जीवन जीने को मजबूर हैं। पच्चासों वर्षों से जिस भूमि पर आवागमन जारी है। मकानों के चौहद्दियों में, सरकारी नक्शे में आम रास्ता दर्ज है मगर उस रास्ते पर भी सरकारी सड़क और नाली निर्माण नहीं है।
इन दोनों मुहल्लों में आज भी गोलेदारी और जमींदारी प्रथा हावी है, जहाँ सरकारी नक्शों में दर्ज आम रास्तों पर निर्माण नहीं हो पाता है। सन् 1992 में एक पक्की सड़क का निर्माण सम्मे मां के फाटक से पुराना सब्जी मंडी तक नगर पालिका ने सरकारी खर्चे से कराया था जो वर्तमान में टूटी फूटी अवस्था में है लेकिन छब्बीस सालों बाद भी इसका पुनर्निर्माण नहीं हो पाया है। सूत्रों के मुताबिक और नाम ना छापने की शर्तों पर यहाँ के निवासियों ने बताया कि सरकारी सुविधाओं के अभाव का मुख्य कारण जमींदारी और गोलेदारी प्रथा का हौव्वा नहीं है बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में एक तरफा सुनवाई है क्योंकि आला अधिकारी भी इनकी पहुँच के आगे बौने साबित हुए हैं। इन दोनो मुहल्लों की समस्याओं को देखकर ऐसा लगता था कि मौलिक अधिकारों की बहाली होनी क्या बाकी है? अहरौरा चेयर पर्सन गुलाब मौर्य की ओर इन दोनों वार्डों की जनता देख रही है क्योंकि उनके चुनावी वादों में इन समस्याओं का जिक्र था।अपनी समस्या बताने के पहले जब आम जनता नाम ना छापने की शर्तें रखती है या कैमरे के सामने आने से बचती है तो इतना तो तय है कि आम आदमी दहशत में है। इसकी जिम्मेदारी और ईमानदारी से जांच होनी चाहिए वर्ना चौथा स्तंभ भी पर सवालिया निशान लग सकता है।
 
रिपोर्ट विकास चन्द्र अग्रहरि ibn24x7news मीरजापुर

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